Wednesday, May 6, 2015

यह कैसी आवाज़..


यह कैसी आवाज़..
निर्वाचन में करें तमाशा,
काले-काले नोट,
विज्ञापन की चकाचौंध में,
लुटें करोड़ों वोट,
लोकतंत्र ने पहना डाला,
एक व्यक्ति को ताज|
यह कैसी आवाज़..
सपनों को ऐसे बेचा ज्यों,
स्वर्गलोक की सैर, 
बातों से यूँ लगता जैसे,
कोई शत्रु न गैर,
अंधभक्ति के आकर्षण को,
रंच न आये लाज| 
यह कैसी आवाज़..
कल तक तो थी उत्तम खेती,
आज बना व्यापार,
गाँव गरीब किसान सहस्रों,
सहें भूख की मार|
छलियों बलियों ऊपर सत्ता,
ख़ूब दिखाये नाज़|
यह कैसी आवाज़..

Sunday, March 15, 2015

ठग राष्ट्रद्रोहियों


ठग राष्ट्रद्रोहियों के उतने हबीब होते,
दौलत पसंद जितने सत्ता करीब होते|
ये सत्य कथ्य पूरा माने भले न कोई,
उपदेश जो सुनाते वे कुछ अजीब होते|
इंकार ख़ूब करिये ये भी कभी न भूलें,
ईमानदार जग में सचमुच गरीब होते|
ये सोच लोकशाही कैसे दफा करेगी, 
सत्ता वही सँवारे जिनके नसीब होते|
कोई न मित्र रिपु है ऐसा उन्हें न मानें, 
जो राजनीति करते वे तो रकीब होते|
ये दौर लोकशाही सम्वाद के लिए है-
वरना 'तुका' करोड़ों ढोते सलीब होते|

Saturday, March 7, 2015

भक्ति पोषक कैद


भक्ति-पोषक कैद के बाहर निकलिए तो,
सत्य से होगा मिलन प्रिय और चलिए तो|
अर्थ के पसरे तिमिर को नष्ट यदि करना-
कुछ पलों को ही सही बन दीप जलिए तो|
प्यास सबकी शान्त करने की अगर इच्छा-
बर्फ -सा सरि के लिए दिनरात गलिए तो|
छाँव देकर तृप्त करना है अगर जग को-
भूमि पर नित वृक्ष -सा परमार्थ फलिए तो|
चाहते यदि ज़िन्दगी प्रिय हो 'तुका' जैसी-
पीड़तों पर प्यार पूरित लेप मलिए तो|

Friday, February 6, 2015

गरीबों का करना उत्थान-


धन्नासेठों के प्रतिनिधि का, यह अजीब ऐलान,
गरीबों का करना उत्थान|
गरीबों का करना उत्थान||
उजले वस्त्र ह्रदय के काले, शक्तिशालियों के रखवाले,
क्यों परमार्थ करें वे जिनके, लगे हुये विवेक पर ताले/ 
जिन्हें चलाना सदा सुहाये, अन्धभक्ति अभियान, 
आज ये उनका कैसा ज्ञान?
गरीबों का करना उत्थान|
गरीबों का करना उत्थान||
जमाखोरियों के रक्षक जो, शोषित दलितों के भक्षक जो,
डसने को हर जगह घूमते, फिरते गलियों में तक्षक जो|
बात- बात में जो ले लेते, कमजोरों के प्राण,
आज ये उनका कैसा दान?
गरीबों का करना उत्थान|
गरीबों का करना उत्थान||
जिनको प्रिय जीवन में सत्ता, जिनको मिले मुफ़्त में भत्ता,
जिनक काले कार्य समझता, न्याय- वृक्ष का पत्ता- पत्ता|
बनी हुयी जिनकी सदियों से, परजीवी पहचान|
आज यह उनका कैसा गान? 
गरीबों का करना उत्थान|
गरीबों का करना उत्थान||

Monday, January 26, 2015

ये लोकतंत्र है


ये लोकतंत्र है लोकतंत्र, दुनिया में छायेगा|
जो पीछे आज खड़ा है, कल आगे आयेगा||
सहजोरी अत्याचारी, ये नफ़रत की बीमारी,
छू उनको कभी न सकती, जो सच्चे प्रेम प्रभारी|
जो गया सताया जितना, वह उतना मुस्कायेगा|
जो पीछे आज खड़ा है, कल आगे आयेगा||
आन्यायी पर्वत जैसा, धनपशु हो चाहे कैसा,
सब होंगे मानव जैसे, आयेगा दिन भी ऐसा|
सच को सच कहने वाला, जन-मन हो जायेगा| 
जो पीछे आज खड़ा है, कल आगे आयेगा||
ये अपने और पराये, ये सत्ता सुख के साये,
निश्चय वे निष्क्रिय होंगे, जो भी विभेद उपजाये|
जीवन प्रकाश को कोई, तम निगल न पायेगा|
जो पीछे आज खड़ा है, कल आगे आयेगा||

Tuesday, January 20, 2015


एक गीत:-
पुलिस कमिश्नर सी.एम, होंगे, मंत्री थानेदार|
मुसीबत में अब ठेकेदार|
मुसीबत में अब ठेकेदार||
जो चलवाते रहे लाठियाँ, जो दिलवाते रहे गालियाँ,
मजमेबाजी करके जिसने, बजबायीं हैं खूब तालियाँ|
लोकतंत्र पर फिर चलने को, डन्डे हैं तैयार|
मुसीबत में अब ठेकेदार|
मुसीबत में अब ठेकेदार||
छीना-झपटी खींचा-तानी, जिनकी आदत में मनमानी,
सम्विधान के अनुपालन में, जो करते बस आनाकानी|
जय-जयकार कराते अपनी, करके असत प्रचार|
मुसीबत में अब ठेकेदार|
मुसीबत में अब ठेकेदार||
सुविधाभोगी अवसरवादी, परसेवा लेने के आदी,
अपने जीवन के बोझे की, गठरी कमजोरों पर लादी|
धनवानों के पैर दबायें, निर्धन को दुत्कार|
मुसीबत में अब ठेकेदार|
मुसीबत में अब ठेकेदार||

Saturday, December 20, 2014

बढ़ा दर्प अभिमान


सत्ता हथियाने से कितना, बढ़ा दर्प अभिमान|
अनाड़ी बन बैठे विद्वान||
अनाड़ी बन बैठे विद्वान|||
कुम्भ प्रेम के फोड़ रहे हैं, मर्यादायें छोड़ रहे हैं,
सामाजिक जीवन की सारी, सीमाओं को तोड़ रहे हैं|
नागरिकों पर लगे चलाने, जड़ता के पाषाण,
अनाड़ी बन बैठे विद्वान||
अनाड़ी बन बैठे विद्वान|||
थोप रहे अनीति की भाषा, ज्ञात न जिन्हें न्याय परिभाषा,
सम्विधान विपरीत व्यक्त वे, करने लगे दबी अभिलाषा|
लोकतंत्र के बिना रहेगी, कहीं नहीं पहचान|
अनाड़ी बन बैठे विद्वान||
अनाड़ी बन बैठे विद्वान|||
अपना कहा बदलने वालो, छल की चालें चलने वालो, 
अवसर के अनुकूल लाभ के, साँचों भीतर ढलने वालो|
भय फैलाने से बन सकते, कभी न विश्व महान| 
अनाड़ी बन बैठे विद्वान||
अनाड़ी बन बैठे विद्वान|||