Sunday, February 6, 2011

कथावस्तु

तुम्हारे  बिना कौन पहचान मेरी?
तुम्हीं से हुई राह   आसान  मेरी |
तुका  ने तुकाराम जैसा जिया है -
नहीं है कथावस्तु अनजान मेरी ||
                                                                          

Friday, January 28, 2011

सुयश चाहता हूँ

तुम्हारे ह्रदय  को  सरस  चाहता हूँ ,
सफलता भरा हर दिवस चाहता हूँ|

तुम्हें  बंचकों   से   बचाए   रखे जो -
उसी चेतना का  निकष  चाहता हूँ  |

सदा बाँटने से  बढे  और   भी  जो-
उसी प्रेम का रसकलश  चाहता हूँ |  
                                 \
किसी बात का है गिला बोलिए तो-
चलाना खुली मैं  बहस  चाहता  हूँ |

तिरंगा लिए विश्व जब साथ में हो -
वही  देखना  नव बरस  चाहता  हूँ |

तुकाराम  ने तो  यही  प्रार्थना  की -
सदा मैं सभी का सुयश चाहता हूँ |
                                                               

Saturday, November 27, 2010

दुलार दो

जातियां  होती   नहीं    इनको   नकार दो,
आदमी   को  आदमीयत   से   सवांर  दो,
थाम ली है जब कलम कवि के स्वरूप में -
तो सभी  को आप   अपनों सा दुलार  दो   |   

Friday, November 19, 2010

धूर्त का

भूभल ऊपर जिनके तलवे किंचित नहीं जले, 
दुर्गम पथ पर शूल न आये जिनके पांव तले,
वे  जीवन की     सच्चाई  को   कैसे   जानेंगे -
जिनके  हाथ-पैर  पानी  में  रहकर  नहीं   गले,|

धूर्त  का हर हाल    में प्रतिरोध  होना चाहिए ,
धर्म के परिक्षेत्र का भी बोध होना चाहिए,
शांति तो अनिवार्य है इंसानियत  के मार्ग में-
 किन्तु चोरों के कृतों पर क्रोध होना चाहिए|

Saturday, November 13, 2010

दो मुक्तक

           
    स्नेह सिंचित जगत को वचन चाहिए |
    अनुकरण के लिए आचरण चाहिए ||
    शांत कर दे थकन जो मधुर पर्श से - 
    वह वदन  को  सरसतम`पवन चाहिए ||


    जगमगाने  लगे  दीप    विज्ञान के |    
    अब रहेंगे   नहीं   स्रोत अज्ञान  के||
    कह रही हर कली फूल भी  पात भी -      
    हम सभी साथ हैं विश्व उत्थान के||




    Sunday, November 7, 2010

    Ashiyane prem ke

    आशियाने प्रेम के सबको मिले नहीं
     साठ वर्षों बाद भी गुलशन  खिले नहीं
    यत्न तो लाखों हुए लेकिन अभी तुका -
    टूट पाये द्वेष-नफरत के किले नहीं

     अर्थ की आंधियां तेज चलने लगीं
    भूख से अर्थियाँ कुछ निकलने लगीं
    सृष्टि का इस कदर तेज दोहन हुआ -
    वक्त के पूर्व ऋतुएं बदलने लगीं

    Saturday, November 6, 2010

    Moolya iska naheen

    मूल्य इसका नहीं लोग धनवान हैं
    और बलवान विद्वान गुणवान हैं
    मूल्य हैं लोग क्या ज्ञान धन शक्ति से
    विश्व कल्याण के योग्य इन्सान हैं